मंगलवार, 8 जुलाई 2014

बहारों का फ़लक चाहता हूँ

NAUSHAD ALAM

बहारों का फ़लक चाहता हूँ
तेरे नरगिसी हुस्न की महक चाहता हूँ

मेरी वफाओं का सिला मिले न मिले
तेरी अदाओं का लहक चाहता हूँ



तेरी बाहों का सहारा मिले न मिले
तेरी चूड़ियों की खनक चाहता हूँ

तेरी पलकों की छाँव मिले न मिले
तेरे काजल की चमक चाहता हूँ

तेरे होंठों का जाम मिले न मिले
तेरी शोख़ियों की दमक चाहता हूँ

तेरे क़दम मेरी तरफ बढ़े न बढ़े
तेरी पायल की झनक चाहता हूँ

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