शनिवार, 13 दिसंबर 2008

दुनिया

prem prakash ( Jharkhand)

हाय रे दुनिया
क्या कुछ नहीं बोलती
थ्बन बा पके बच्चों को
हाय रे! दुनिया
तेरी चाल भी निराली
देते तो कुछ नहीं
पर आए अगर सामने तो
आंखों में
गंगा- युमना की धार दिल में ?
अपनो के प्रति प्यार
मुख मेंच...... च....ेच....ओह! क्ी आवाज
हिचकियों से भरे ’ाब्दों में
बाप की बड़ाई
जैसे सिने पर उनके चल रही हो कटार फिर ........
ये दुनिया कहती है
उसको........
जो भी करों
सोच- समझकर करो
मुझसे डरों
मत कहो तुम
बात सच्चे
न्याय- अन्याय की
मत करों तुम बातें
ये सबकाम
तो मेरा हैअगर वो कर जाए ऐसा
तो फिर....
ये दुनिया कहती है
बिन बाप का बच्चा है
आवारा है
लथेर है
साला टुअर है!

1 टिप्पणी:

परमजीत बाली ने कहा…

बढिया रचना है।