बुधवार, 14 नवंबर 2018

मैं अकेला ( तीर्थ नाथ आकाश)


मैं अकेला 
लेकिन दीवाली अकेली नहीं
कितने दीप जले
कितनी जली मोमबत्तियां
सब ने दुआ की उससे
की दूर हो अंधियारा
लेकिन क्या अंधेरा दूर हुआ
नहीं कभी नहीं
खत्म नहीं हो सकता अंधियारा.
कभी मन में दीपक जलाओ
कभी मन के घर भी सजाओ
कुरीतियों को करो समाप्त
बदलों समाज का रूप
हर एक व्यक्ति रहे खुश
हर घर आये खुशहाली
मैं अकेला, जीवन भी अकेला
फिर भी सब के लिए
दुआ के साथ एक दीप जलाली
सभी को हैप्पी दीवाली.

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