गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

सरहुल

आलोका
  
मांदर की थाप
हडिया
झूमर
और सरई फूल
आया प्रकृति परब सरहुल
 
सरई का सुगंध
जंगल- जंगल
बोने- बोन
और खेत- खलिहान
सब मस्ती में मग्न
 
उल्लास
भक्ति
और प्रेम  
आस्था के कई  रंग 
प्रकृति के संग
 
शुद्ध हवा के झोंके
रंगबिरंगे फूल
आया प्रकृति परब सरहुल
 
 
 

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