सोमवार, 4 जुलाई 2016

#फूल की# राह (Aloka)

फूल_ की_ राह#
 अब कांटो से भर दिया।
वो आया एक फूल लेकर।
हम चुप रहे।
फिर आया फूल के झूंड लेकर
हम चुप रहे।
वो आया समूह में।
हम चुप रहे।
वो आया हमारा मुखिया बन कर।
हम चुप रहे।
वो आया हमारे समूह मे।
हम चुप रहे।।
वो आया अगुआ बन कर।
हम चुप रहे।
अब वो आया आपना निर्णय लेकर।
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दर्दे दिल की दास्तां (Naushad Alam )



दर्दे दिल की दास्तां 
बन गया हूँ
गमे दिल का हाल
कोई मुझसे पूछे
मुरझाये हुए फूलों का
गुलिस्तां बन गया हूँ
राहे इश्क में 
क़दम दर क़दम
मिला ज़ख्म ऐसा
सिसकियों में जीने का
वास्ता बन गया हूँ
वफा ए इश्क में
हर घड़ी हर पल
मिला इनाम ऐसा
जीते जी मौत से 
रिश्ता बना लिया हूँ
अब तो लोग ये कहने लगे हैं
मैं हूँ बीमार
मुझको है दवा की दरकार
इश्क का है ये कैसा इम्तेहान
जिंदगी भर के लिए
हकीमों का दासता बन गया हूँ

बुधवार, 1 जून 2016

जिंदा लाशो का शहर है (@)


जिंदा लाशो का शहर है
जी रहे लोग बे असर है।
अपनी ही जमी पर 
बेगाने हो चुके हैं।
ताकते मुह वो हार का
न साथी न राह का
जिंदा लाशो का शहर है।
वे जुबा बे खबर है।
रोज लूट रहे है।
कहते सीधे अच्छे सब।
ये लाशो के शहर में।
जिंदा लाशो का शहर है।
जहां के लोग वे खबर है।
राजनीति बेअसर है।
पार्टी सब के सब वेजूबा है। 
रोज ऊठ रहे है।
व्यापरियों के नारे
सब रख आये
तराजू के साये
जिंदा लाशो का शहर है।
शहर पे शहर है।
अंधेरे मे जी रहे है।
सब सौप आये है।
वोटो का सौदा कर आये है।
एक -एक 
राजनीति पार्टी ने
दिखता अवकात है।
सत्ता के गलियारों मे
जिंदा लाशो की फौज है।




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बुधवार, 13 अप्रैल 2016

तेरे चोटी की वो उंचाई (# आलोका#)


तेरे चोटी की वो उंचाई


अब तक न छु पाई

तेरे वाण के झुले पर
अब तक न छु पाई।

सेकडो बाबा के बीच

ये बाबा न खोज पाई

इस जमी से उस जहा तक

तेरे हुनर को कह आई।

उस हुनर से 

आपनी मंजिल खोज आई

तेरे कदमो मे

सारी कथा लिख आई।

अब चलोगे जहा

हर पीढी की यादो मे

बाबा नागार्जुन की याद आई।।।

बुधवार, 27 अगस्त 2014

जाने क्यूँ प्यार ना मिला ,


जाने क्यूँ प्यार ना मिला

जाने क्यूँ फूल न खिला



जाने क्यूँ उनको मुझसे  
हर क़दम पे था गीला। 

खाब जो देखे थे हमने  

क्यूँ नहीं पुरे हुए।
वो मेरे होकर भी अब तक 

क्यूँ नहीं मेरे हुए
एक ही छत के निचे हम क्यूँ 

हैं अधूरे और बँटे, ज

बाक़ी कुछ भी ना रहा
फिर क्यूँ रह गया सिलसिला।
स्म से क्यूँ जां जुदा 

वक़्त से 


लम्हे कटे।
 
प्यार करने से शायद 

सब को मिलता ये सिला।

मंगलवार, 26 अगस्त 2014

जीते जी गर हुझसे मीठी बातें ना कर सके


जीते जी गर हुझसे मीठी बातें ना कर सके ,
बाद मरने के मेरे तुम , 
अश्क़ बहाओ भी तो क्या।
हर पल ये एहसास होता है के मैं तो तन्हा हूँ ,
द मरने के मेरे तुम पास आओ भी तो क्या।
अपने
वक़्त से नाकारा रूठा-रूठा सा एक लम्हा हूँ।
बा वीराने में एक दिन 

चुपके से बहार आई

,
जीने का मक़सद देकर वो 

मुझको जीना सिखलाई। 

लना था ,

तप्त रेत मेँ भी कांटे थे 
पर मुझको तो

बाद मरने के मेरे तुम खुशी में शामिल हुए तो क्या।

शम्मा बनकर महफिल में , मुझको तो बस 

जचलना था।
बाद मरने के मेरे , चारागर बनके आओ तो क्या।
जीने मरने की कसमों के संग मेरे तो जुड़ गए ,

१८/१०/२००८
अपनी नफ़रत देकर मुझको , राह अपनी मुड़ गए।
बाद मरने के मेरी तस्वीर से प्यार करो तो क्या।


उत्तम पाल

रविवार, 27 जुलाई 2014

आसान नहीं होता

जिंदगी जीना  आसान नहीं होता 

बिना संघर्ष कोई महान नहीं होता 

जब तक न पड़े हथौड़ी की मार

तब तक पत्थर भी भगवान नही होता ।